कुर्सी दिल्ली की चुप रहती है , नाग निकलते हैं |
दूध हमारा पी पी करके , जहर उगलते हैं | भारत माता के विरोध में , नारे लगते हैं |
फूलों के बागों में आकर , शूकर पलते हैं ||
"जय कुमार"
अरमान हमारा ,,,,,,रूठ गया !
आश का वह भरम टूट गया !!
ह्रदय में ,,,,,,,,,,,,खामोशी छाई !
भावों का दरिया,, सूख गया !!
खड़ा हाथ में ,,,तलवार लिए !
मानवता बंधन,,,,टूट गया !!
वासनाओं कि ,,,,आँधी आई !
रिश्तों का भरम,, ,टूट गया !!
वक्त का कैंसा ,,पड़ाव आया !
इंसान को इंसान ,,लूट गया !!
अनाचार के ,,,,,,मंजर देखके !
साहस का बाँध ,,,,,फूट गया !!
खामोश हुआ ,जीवन स्पंदन !
साँसो से ह्रदय ,,,,,,,,रुठ गया !!
"जय कुमार"
भारत माँ के श्री चरणो में ,
सादर शीश ,,,झुकाता हूँ !
बलिदानों की अमर कहानी ,
सबको आज,, ,सुनाता हूँ !!
झाँसी की रानी ,,,मरदानी !
तलवारो से लिखे कहानी !
महल छोड़ रण में लड़ती थी !
दुश्मन पर भारी पड़ती थी !!
प्राणो की बलि ,,,_देने वाली !
स्वराज आग जलाने वाली !!
भारत का स्वाभिमान है जो ,
रानी कि गाथा ,,,,,,गाता हूँ !!
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,__सुनाता हूँ !!
भगत सिंह से ,,,,वीर हमारे !
आजादी के थे ,,,,,,,,मतवारे !!
स्वराज्य से यारी ,,करते थे !
दिल से वतन पर ,,,मरते थे !!
चड़ फाँसी विदा हो गये वो !
अमर अमिट नाम कर गये वो !!
शहीद वीर भगत सिंह जी को ,
श्रध्दा सुमन ,,,,,,,,,चढ़ाता हूँ !!
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,,सुनाता हूँ !!
चलि हवा जब ,,,,दुराचार की ,
अहिंसा का तब मसिहा आया !
एक देश एक आवाज बनी तब !
सत्याग्रह की बात ,,,चली जब !!
लिख गई तब एक नई कहानी !
देश ने देखी थी ,,,,तब जवानी !!
तिरंगे को सम्मान ,,,,,मिल गया ,
स्वराज की बात,,,,,, बताता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,,,,सुनाता हूँ ।
कोई उत्तर कोई दक्षिण का !
कोई पूरब कोई पश्चिम का !
कोई तमिल कोई हिंदी का !
कोई भेद ना सारे हिंद का !
सबने अपना लहु बहाया !
भुला दिया गया उनका साया !!
इतिहास भुला रहा जिनको !
मैं उनको शीश,,,, नभाता हूँ !!
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!
लाखों शहीदों कि आजादी !
सम्भाल के रख न कर बर्बादी !!
लोकतंत्र को घुन न लगा अब !
खुदगर्जी से ऊपर उठ अब !!
अपने वतन को देखो भाई !
आपस में ना करो लड़ाई !!
जो ना माने ,,,,,,हार काल से ,
उन वीरो कि गाथा गाता हूँ !!
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!
भारत माँ के श्री चरणों में ,
सादर शीश,,,,,,, झुकाता हूँ !
वलिदानो की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!
"जय कुमार"14/08/14
काल की डाल पर ,,,,घौंसले बनाने थे !
दरदरे जख्मों पर,,,,,, मरहम लगाने थे !!
रफ्तार तेज रही ,,,,हयात ए सफर की ,
एक वक्त में उम्र के ,,,,,पुष्प खिलाने थे !
आसमां में आफत ,धरती पे कहर था ,
दलदली राहों पर दो,,,,,, पैर जमाने थे !
साहिल के बीच भँवर का साथ मिला ,
सदियों के बिछड़े दिन रात मिलाने थे !
हाथ जल चुके थे,,,,,,,,,, होम लगाने में ,
जिम्मेदारियों के चप्पू ,,,, तो चलाने थे !
जय पराजय का साथ रहा जिंदगी भर ,
हाथों में भाले लिए ,,,,,,, खड़े जमाने थे !!
"जय कुमार"10/08/15
रात सो गयी दिन,,,,,, जग जायेगा
तम दूर तलक अब ,,,भग जायेगा
खैरियत पूंछ ले ,,,,,,अपनी आपसे
दिल तेरा गमों को ,,,,,तज जायेगा
बुझने लगे भरम का,,, दीपक तब
जीवन पर ताला,, ,,, लग जायेगा
मन के तम को सुला भरोसा जगा
दामन वागों सा,,,,,,,,,, सज जायेगा
सुराक को खामियां न समझ यार
धुन बन बांसुरी सा,,,,बज जायेगा
"जय कुमार "06/08/16
हौंसलों को पर ,,दिया करो !
कभी अपने को जिया करो !!
जिंदगी सम्मान , से हो गर ,
थोड़ी थोड़ी ही , पिया करो !
रंज पाले है ,,,,,,,खूब दिल में ,
बेवजह ही हँस , लिया करो !
सुकूं मिले दिल को जिससे ,
काम वो भी कर लिया करो !
चिराग अँधेरे से हारते नहीं ,
एक चिराग जला लिया करो !
मौसम की रवानी को देखके ,
बूँदों में ही भीग ,, लिया करो !
दिल न दे गवाही ,,, यार वो ,
काम हरगिज न किया करो !
इस रंग बदलती ,,दुनिया में ,
एक पहचान बना लिया करो !
इश्क याद आये ,,महफिल में ,
अपने अश्क छुपा लिया करो !
मुहब्बत की गैरत ,,मर जाये ,
जज्जवात दबा ,,, लिया करो !
गुलशन को हो जरुरत तेरी ,
हँसते हुए कुर्बानी दिया करो !
सारे गमों को कह अलविदा ,
जिंदा दिली से ,,,,,जिया करो !!
"जय कुमार" 06/08/14