Wednesday, 31 August 2016

कुर्सी दिल्ली की चुप रहती है , नाग निकलते हैं |
दूध   हमारा  पी  पी  करके  ,  जहर  उगलते  हैं | भारत  माता  के  विरोध  में   ,    नारे   लगते   हैं |
फूलों  के   बागों   में  आकर  ,   शूकर  पलते  हैं ||

"जय कुमार"

Tuesday, 30 August 2016

काव्यमित्र परिवार के समस्त सदस्यों को
सादर नमन !!
"याद" बिषय पर मेरा
रोला छंद  में पहला प्रयास
सादर नमन के साथ !!

पल पल पीछे जात ,  अब आगे  कुछ ना  बचा |
याद   करे   फरियाद  ,  देखो   पीछे   जो  रचा |
निकल चुका हूँ दूर ,  अब याद कुछ भी न रहा |
भूल  गया हर  बात ,  माँ  का  साथ  याद  रहा ||

"जय कुमार "

Friday, 26 August 2016

मुफलिसी के जख्म क्या कम लगे
नमक   लेकर  जो  बरसात  आई

"जय कुमार "

कौन कहता है वक्त हर जख्म भर देता
मेरे  दिल  के जख्म  हरे  के  हरे  रहे है
सूख  जाता  होगा  समुंदर  तेज धूप में
मेरी आंख  के अश्क भरे  के भरे रहे है

"जय कुमार "२६/०८/१६

Monday, 22 August 2016

धरती की कहानी आशमान ,,सुनाने लगता है !
जीत लेता खुदको खार पुष्प खिलाने लगता है !
भंवर को चुनौती दे ,,,,,,, खड़ा रहता हूँ राह पर ,
लहरें हार जाती साहिल ,,,,,,,,, बुलाने लगता है !!

"जय कुमार" 23/08/16

Saturday, 20 August 2016

अरमान हमारा ,,,,,,रूठ गया !
आश का वह भरम टूट गया !!

ह्रदय में ,,,,,,,,,,,,खामोशी छाई !
भावों का दरिया,, सूख गया !!

खड़ा हाथ में ,,,तलवार लिए !
मानवता बंधन,,,,टूट गया !!

वासनाओं कि ,,,,आँधी आई !
रिश्तों का भरम,, ,टूट गया !!

वक्त का कैंसा ,,पड़ाव आया !
इंसान को इंसान ,,लूट गया !!

अनाचार के ,,,,,,मंजर देखके !
साहस का बाँध ,,,,,फूट गया !!

खामोश हुआ ,जीवन स्पंदन !
साँसो से ह्रदय ,,,,,,,,रुठ गया !!

"जय कुमार"

Tuesday, 16 August 2016

जिस्म से रूह जुदा हो जायेगी
रूह में यारी,,, खुदा हो जायेगी

"जय कुमार"

Saturday, 13 August 2016

भारत माँ के श्री चरणो में ,
सादर शीश ,,,झुकाता हूँ !
बलिदानों की अमर कहानी ,
सबको आज,, ,सुनाता हूँ !!

झाँसी की रानी ,,,मरदानी !
तलवारो से लिखे कहानी !
महल छोड़ रण में लड़ती थी !
दुश्मन पर भारी पड़ती थी !!
प्राणो की बलि ,,,_देने वाली !
स्वराज आग जलाने वाली !!
भारत का स्वाभिमान है जो ,
रानी कि गाथा ,,,,,,गाता हूँ !!

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,__सुनाता हूँ !!

भगत सिंह से ,,,,वीर हमारे !
आजादी के थे ,,,,,,,,मतवारे !!
स्वराज्य से यारी ,,करते थे !
दिल से वतन पर ,,,मरते थे !!
चड़ फाँसी विदा हो गये वो !
अमर अमिट नाम कर गये वो !!
शहीद वीर भगत सिंह जी को ,
श्रध्दा सुमन ,,,,,,,,,चढ़ाता हूँ !!

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,,सुनाता हूँ !!

चलि हवा जब ,,,,दुराचार की ,
अहिंसा का तब मसिहा आया  !
एक देश एक आवाज बनी तब !
सत्याग्रह की बात ,,,चली जब !!
लिख गई  तब एक नई कहानी !
देश ने देखी  थी ,,,,तब जवानी !!
तिरंगे को सम्मान ,,,,,मिल गया ,
स्वराज की बात,,,,,, बताता हूँ ।

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,,,,सुनाता हूँ ।

कोई उत्तर कोई दक्षिण का !
कोई पूरब कोई पश्चिम का !
कोई तमिल कोई हिंदी का !
कोई भेद ना सारे हिंद का !
सबने अपना लहु बहाया !
भुला दिया गया उनका साया !!
इतिहास भुला रहा जिनको !
मैं उनको शीश,,,, नभाता हूँ !!

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!

लाखों शहीदों कि आजादी !
सम्भाल के रख न कर बर्बादी !!
लोकतंत्र को घुन न लगा अब !
खुदगर्जी से ऊपर उठ अब !!
अपने वतन को देखो भाई !
आपस में ना करो लड़ाई  !!
जो ना माने ,,,,,,हार काल से ,
उन वीरो कि गाथा गाता हूँ !!

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!

भारत माँ के श्री चरणों में ,
सादर शीश,,,,,,, झुकाता हूँ !
वलिदानो की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!

"जय कुमार"14/08/14

Thursday, 11 August 2016

दिल्ली के दरबारो की क्यों ,,,,,, अब कोई लिखता नहीं
सत्तर बर्ष से सपने दिखाते ,,,,,,,,सत्य तुमे दिखता नहीं 
वादे और इरादे इनके ,,,,,,,,,,,  लगते नदी के दो साहिल
पैकिंग कितनी सुंदर करलो , सदियों झूठ बिकता नहीं

"जय कुमार "11/08/16

Tuesday, 9 August 2016

काल की डाल पर ,,,,घौंसले बनाने थे !
दरदरे जख्मों पर,,,,,, मरहम लगाने थे !!

रफ्तार तेज रही ,,,,हयात ए सफर की ,
एक वक्त में उम्र के ,,,,,पुष्प खिलाने थे !

आसमां में आफत ,धरती पे कहर था ,
दलदली राहों पर दो,,,,,, पैर जमाने थे !

साहिल के बीच भँवर का साथ मिला ,
सदियों के बिछड़े दिन रात मिलाने थे !

हाथ जल चुके थे,,,,,,,,,, होम लगाने में ,
जिम्मेदारियों के चप्पू ,,,, तो चलाने थे !

जय पराजय का साथ रहा जिंदगी भर ,
हाथों में भाले लिए ,,,,,,, खड़े जमाने थे !!

"जय कुमार"10/08/15

Saturday, 6 August 2016

रात सो गयी दिन,,,,,, जग जायेगा
तम दूर तलक अब ,,,भग जायेगा

खैरियत पूंछ ले ,,,,,,अपनी आपसे
दिल तेरा गमों को ,,,,,तज जायेगा

बुझने लगे भरम का,,, दीपक तब
जीवन पर ताला,, ,,, लग जायेगा

मन के तम को सुला भरोसा जगा
दामन वागों सा,,,,,,,,,, सज जायेगा

सुराक को खामियां न समझ यार
धुन बन बांसुरी सा,,,,बज जायेगा

"जय कुमार "06/08/16

Friday, 5 August 2016

हौंसलों को पर ,,दिया करो !
कभी अपने को जिया करो !!

जिंदगी सम्मान , से हो गर ,
थोड़ी थोड़ी ही , पिया करो !

रंज पाले है ,,,,,,,खूब दिल में ,
बेवजह ही हँस , लिया करो !

सुकूं मिले दिल को जिससे ,
काम वो भी कर लिया करो !

चिराग अँधेरे से हारते नहीं ,
एक चिराग जला लिया करो !

मौसम की रवानी को देखके ,
बूँदों में ही भीग ,, लिया करो !

दिल न दे गवाही ,,, यार वो ,
काम हरगिज न किया करो !

इस रंग बदलती ,,दुनिया में ,
एक पहचान बना लिया करो !

इश्क याद आये ,,महफिल में ,
अपने अश्क छुपा लिया करो !

मुहब्बत की गैरत ,,मर जाये ,
जज्जवात दबा ,,, लिया करो !

गुलशन को हो जरुरत तेरी ,
हँसते हुए कुर्बानी दिया करो !

सारे गमों को कह अलविदा ,
जिंदा दिली से ,,,,,जिया करो !!

"जय कुमार" 06/08/14