तुम राह बनाओं दूर तलक ,
पगडंडी मेरी होगी ।
तुम खोज लाओ खूब खजाने ,
एक अन्नी मेरी होगी ।
पगडंडी मेरी होगी ।
तुम खोज लाओ खूब खजाने ,
एक अन्नी मेरी होगी ।
एक अन्नी मेरी होगी . . . .
बड़े बड़े तुम शहर वसालो ।
आसमान पर धाँक जमालो ।
तुम खूब बनालो बड़ी इमारत ,
एक कन्नी मेरी होगी ।
पृथ्वी के भू - भाग बड़ालो ।
समुंदर पर भी राज करालो ।
तुम खोज निकालो नये तारो को ,
एक जननी मेरी होगी ।।
"जय कुमार"
बड़े बड़े तुम शहर वसालो ।
आसमान पर धाँक जमालो ।
तुम खूब बनालो बड़ी इमारत ,
एक कन्नी मेरी होगी ।
पृथ्वी के भू - भाग बड़ालो ।
समुंदर पर भी राज करालो ।
तुम खोज निकालो नये तारो को ,
एक जननी मेरी होगी ।।
"जय कुमार"