Wednesday, 7 January 2015

तुम राह बनाओं

तुम राह बनाओं दूर तलक ,
पगडंडी मेरी होगी ।
तुम खोज लाओ खूब खजाने ,
एक अन्नी मेरी होगी ।
एक अन्नी मेरी होगी . . . .
बड़े बड़े तुम शहर वसालो ।
आसमान पर धाँक जमालो ।
तुम खूब बनालो बड़ी इमारत ,
एक कन्नी मेरी होगी ।
पृथ्वी के भू - भाग बड़ालो ।
समुंदर पर भी राज करालो ।
तुम खोज निकालो नये तारो को ,
एक जननी मेरी होगी ।।
"जय कुमार"

बंदगी ये मेरी

बंदगी ये मेरी कैंसा कमाल कर गई ।
जिंदगी मुझसे कई सवाल कर गई ।
जद्दोजहद जिंदगी भर की जिंदगी से ,
दो जून की रोटी उम्र हलाल कर गई ।।
"जय कुमार"03/01/15

Saturday, 3 January 2015

उलझे सवालों

उलझे सवालों में जबाब ढ़ूँढता हूँ ।
मुरझाये फूलों में शबाब ढ़ूँढता हूँ ।।
"जय कुमार"2/1/15

सियारों के

सियारों के घर शेर पलने लगे ।
कायरों सी बात अब करने लगे ।
जी हूजूरी का ये मौसम देखिए ,
चार पैरों पर इंसाँ चलने लगे ।।
"जय कुमार"01/ 01/15

मजहबी

मजहबी नफरतों का रोग चंगा है ।
राम रहीम चाहने वालों में पंगा है ।
वक्त रोता इंसान को धरती पर लाके ,
मजहब के नाम पे हर रोज दंगा है ।।
"जय कुमार"01/01/15

समय का

समय का ये असर है ।
आज की ये खबर है ।
रुक ना जाना राह में ,
जिंदगी इक सफर है ।।
"जय कुमार"1/1/15

कोई जीतकर

कोई जीतकर हारा है ,
कोई हारकर जीता ।
किसी ने जीती जंग है ,
किसी ने दिल जीता ।
हिदुस्तान के वासी है ,
वसती दिलों में गीता ।
किसी के दिल हिमसे ,
किसी के दिल सरिता ।
ह्रदय में राम रहीम है ,
सत्य अहिंसा को पीता ।।
"जय कुमार"31/12/14

वर्ष निकल

वर्ष निकल गया एक और ।
जीवन का घटता जाये छोर ।
सत्य सुबह साँझ ना झूठी ,
चल जा अपने पथ की ओर ।।
तम छाये जब चारों ओर ।
रुठा मन निराशा हो घोर ।
इक सत्य दीप जला लेना ,
हार रजनी लायेगी भोर ।।
अंर्न्तमन पर रखना जोर ।
नाचेगा तब ह्रदय में मोर ।
आये नये पलों का स्वागत ,
पिछले से ना तू मुह मोड़ ।।

"जय कुमार"31/12`/14