Mere Bhav
Friday, 28 May 2021
उसने इंसान बनाया है यह सम्मान की निशानी है
अकड़ रहा जिस तन पर वो चंद लम्हों की कहानी है
मिट्टी का मिट्टी में एक दिन सब मिल जाना है
मौत ही बस मुकम्मल है बाकी तो सब फानी है
"जय कुमार"
Friday, 7 May 2021
लाश
उनकी इक फाइल में बदनाम की तरह हूं
जमाने के लिए अब बेनाम की तरह हूं
लाश हूं ये शमशान नाम दो हमको भी
आंकडों के खेल में गुमनाम की तरह हूं
"जय कुमार "
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