Sunday, 27 October 2013

महात्मा आज तुझे



महात्मा आज तुझे ,
तेरा देश पुकारे रे . . . .
लेकर अहिँसा ज्योति ,
फिर से आजा रे . . . . 
हिँसा का भयानक टांडव ,
होता यहाँ हर दिन ,
अहिँसा के पुजारी ,
तेरा देश बुलाये रे . . . . 
लुट जातीँ तेरी बेटिँयाँ ,
भरे हुए बाजारोँ मेँ ,
आकर देखो इनकी पीड़ा ,
बस तुझसे ही ये ,
आस लगायेँ रे . . . .
अब भ्रष्ट तंत्र मेँ ,
लोकतंत्र का दम घुटता ,
तेरे सपनोँ का भारत ,
देखो यह कैँसे पिटता ,
तु राह तो कोई ,
अब आके दिखलाजा रे . . . .
तेरे नाम पर ही ,
अब तेरा देश लुटता ,
पीड़ित होते अहिँसा भक्ता ,
अब फिर एक बार ,
अहिँसा शक्ति दिखा जा रे . . . . .
रघुपति राघव राजाराम ,
आते अब ये वोटो के काम ,
राम पर अब सियासत ,
राम रहीम को करेँ बदनाम ,
अब सत्याग्रह का फिर ,
असली रुप दिखा जा रे . . . . .
साबरमती के संत को ,
चौराहो पर बैठाकर ,
हर बात तेरी भूल गये ,
नोट पर तुझको बैठाकर ,
तेरे देशवासियोँ ने ,
दिल से निकाला रे . . . .
"जय" विश्व अहिँसा दिवस ,
कि अनेकोँ शुभकामनाएँ !

2 Oct

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