जख्म पर जख्म गहरे लगे हुए हैं ईमान की बज्म में ,,,,,, ठगे हुए हैं
पराये हमेशा पराये ,,,,,,,,,,, ही रहे खून बदला ,सगे कब सगे हुए है
"जय कुमार"६/६/१६
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