गांव कि गलियां , भुला न पाये |
शहर से नजरे , लड़ा न पाये ||
सुलह करते है , रोज रोज हम |
दिन को रात से , मिला न पाये ||
खुशबू अपनेपन की हममें |
कागजी फूल , खिला न पाये ||
खरे सोने से , मिलते रहते |
खोटे सिक्के , चला न पाये ||
निकल गये राहों पर ऐंसी |
गांव कि गोद में , सुला न पाये ||
चकाचौंद की , गली में भूले |
अम्मा कि रोटी, खिला न पाये ||
जबसे छोड़कर , आये कुटिया |
सुकूं को खुदसे , मिला न पाये ||
"जय कुमार "
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