समुंदर का पानी खारा न होता
जमाने में दुश्मन हमारा न होता
जीत लेते हरेक जंग हम भी अगर
वेहयाई में नाम तुमारा न होता
भरोसा न होता जो तुझपर अगर
आसमां पर कोई तारा न होता
पलकों के नीचे अश्क छुपते अगर
समुंदर का पानी खारा न होता
दिलों की मुहब्बत मरहम बनती गर
हरेक शहर में पागल खाना न होता
"जय कुमार "
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