Monday, 12 December 2016

समुंदर  का  पानी   खारा  न   होता
जमाने  में   दुश्मन  हमारा  न  होता

जीत लेते  हरेक जंग हम  भी अगर
वेहयाई  में   नाम   तुमारा  न   होता

भरोसा न  होता  जो  तुझपर  अगर
आसमां   पर   कोई   तारा  न  होता

पलकों के  नीचे  अश्क छुपते अगर
समुंदर   का  पानी   खारा  न   होता

दिलों की मुहब्बत मरहम बनती गर
हरेक शहर में पागल खाना  न होता

"जय कुमार "

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