Wednesday, 17 October 2018

क्यो  इतना   हँसकर  रोते  हो
कंकड़ों  को  दिल  में  ढोते हो
ख्वाव मीठे फलों के दिखाकर
क्यों  बबूल  के  बीज  बोते हो

"जय कुमार "

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