Tuesday, 27 August 2019

गीत गजलों की भाषा

गीत  गजलों  की  भाषा हूँ
दर्द  मजलूम  का  गाता  हूँ

सूख  गये  आंखों  से आंसू
उनका  मैं  मर्ज  सुनाता  हूँ

बना बिछोना धरती जिनका
बीच   में   उनके   पाता  हूँ

गीत  शहनाई  के  न  आते
मजबूरी मन  की सुनाता हूँ

घोर  निराशा  के  अंधेरों में
इक आशा  दीप जलाता हूँ

जिन्हे  जमाने  ने  धुतकारा
मैं  गले   उन्हे   लगाता   हूँ

लहू बहा वतन पर जिनका
उनको  मैं  शीश झुकाता हूँ

कदम मिलाकर चलने में ही
मैं जय  विश्वास  जताता  हूँ

"जय कुमार

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