Friday, 15 November 2019

समझते   समझते समा  रहे हैं
पाते  पाते   सब   गमा  रहे  हैं

बेदखल  करके  दिल  के रिश्ते
दुनिया पे  सिक्का जमा  रहे हैं

हाथ  में  खंजर  सीने  पर  बैठ
हमारी  सीरत   अजमा  रहे  हैं

मौत तो मुकम्मल मंजिल होती
मौत के  लिए  कुछ कमा रहे हैं

मुहब्बत रूह से कर ली जिसने
उसको ही जय सिर नमा रहे  हैं

"जय कुमार "07/10/19

No comments:

Post a Comment