कुछ पलों का मिलन ही हुआ था, इंतजार करती रही उम्र भर आंखे ।।
तेरा आना यूं बहकते हुए मेरा दिल भी मचल कर उछलने लगा ।
संभाला बहुत संभल न सका तेरी बातों से ये मन बहकने लगा ।
सूरत सुहानी इक तेरी लगी, मुझसे झगड़ती रहीं उम्र भर आंखें ।।
कुछ तेरे दिल में कुछ मेरे दिल में अहसासों की अंगड़ाई चली ।
खडे थे दोनों ही यौवन के द्वारे मधुमास में जैसे पुरवाई चली ।
दिलों की कहानी वक्त ने लिखी , दरिया बहाती रहीं उम्र भर आंखे ।।
दुनिया के चलन पर चल न सके, इक दूजे से हम कभी मिल न सके ।
समय की चाल कुछ ऐसी चली, शाखों पर कभी फूल खिल न सके ।
जाने के बाद भी पलके खुली थी, तुझको बुलाती रहीं उम्र भर आंखे ।।
"जय कुमार"
No comments:
Post a Comment