Wednesday, 17 May 2017

सफर चला
मीठे खट्टे कल से
हयात तेरा

सूखा भी जल
मृग सम तृष्णा से
जला जीवन

काल की डाल
कट रही धीरे से
आशा समाप्त

आसमान को
धरा से मिलाना था
स्वप्न अधूरा

अर्थ अनर्थ
अंतर नहीं रहा
परम शांति

"जय कुमार"

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