सफर चला मीठे खट्टे कल से हयात तेरा
सूखा भी जल मृग सम तृष्णा से जला जीवन
काल की डाल कट रही धीरे से आशा समाप्त
आसमान को धरा से मिलाना था स्वप्न अधूरा
अर्थ अनर्थ अंतर नहीं रहा परम शांति
"जय कुमार"
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