मुस्कुराती वस्तियों में बबाल होते रहे
वक्त के साथ इंसां कंगाल होते रहे
वक्त के साथ इंसां कंगाल होते रहे
झूठ को मिली शोहरत गुमनाम हुआ सच
ईमान कि चौखट पर सवाल होते रहे
ईमान कि चौखट पर सवाल होते रहे
समुंदर की खामोशी दिखी न किसी को
दरिया पर उफान के कमाल होते रहे
दरिया पर उफान के कमाल होते रहे
मुहब्बत के अहसास दबे रहे दिलों में
वासनाओं के रोज दलाल होते रहे
वासनाओं के रोज दलाल होते रहे
टूटी न आशा आसमान के तारो से
करीबियों से जज्वात हलाल होते रहे
करीबियों से जज्वात हलाल होते रहे
गुजारी जवानी जय शान शौकत में तूने
बिगडे हिसाब पर अब मलाल होते रहे
बिगडे हिसाब पर अब मलाल होते रहे
"जय कुमार "२०/०९/१७
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