Tuesday, 31 October 2017

तेरी  हर   राह  में   तुझको  सराहा   जाये |
मेरी  हर  चाह  मे  तुझको   बिठाया  जाये ||

जवान महफिलें फिरसे  खुरापात कर गयी |
दिल ने कहा यादों को फिरसे सजाया जाये ||

दिल मशरूफ मुहब्बत की गलियों में ऐसा |
मुरझाये  जख्मों  को   हरा   कराया   जाये ||

सांझ  चिड़कर आज हिसाब मांगती मुझसे |
सुबह दोपहर क्या किया आज बताया जाये ||

खुशियों  के  बीजो ने  दर्द  के  पौधे उगाये |
मत हो  उदास  हयात  को समझाया जाये ||

नफरतो की आग मे झुलझ गया मेरा शहर |
चौराहों   पर   गीता    कुरान  सुनाया  जाये ||

"जय कुमार"

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