सच को वनवास मिला झूठ को ताज मिला आवाज गुम कोयल की गधे को साज मिला स्वार्थ बेल ने पैर पसारे ढांका है आसमां को आंखे तयखानों में बंद अंधों को राज मिला
"जय कुमार "
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