हौंसलों को पर दिया करो
कभी अपने को जिया करो
जिंदगी से मुहब्बत हो गर
थोड़ी थोड़ी ही पिया करो
रंज पाले है खूब दिल में
बेवजह ही हँस लिया करो
सुकूं मिले दिल को जिससे
काम वो भी कर लिया करो
चिराग अँधेरे से हारते नहीं
एक चिराग जला लिया करो
मौसम की रवानी को देखके
बूँदों में ही भीग लिया करो
दिल दे न गवाही यार वो
काम हरगिज न किया करो
इस रंग बदलती दुनिया में
एक पहचान बना लिया करो
इश्क याद आये महफिल में
अपने अश्क छुपा लिया करो
मुहब्बत की गैरत मर जाये
जज्जवात दबा लिया करो
गुलशन को हो जरुरत तेरी
हँसते हुए कुर्बानी दिया करो
सारे गमों को कह अलविदा
जिंदा दिली से जिया करो
"जय कुमार"
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