सत्य मार्ग पर चलते रहना, इतना भी आसान नहीं
रातें दिन को खूब चिढ़ाती, दिनकर का सम्मान नहीं
कांटों वाली राहे मिलती , पैरो पर छाले पड़ते
हरेक द्वार पर संकट मिलता, मौसम से मेहमान नहीं
हाथ हवन में हर दिन जलते,दिल पर ठोकर लगती है
कौन है अपना कौन पराया, कर सकते पहचान नहीं
आत्म बल की कठिन परीक्षा,पल पल हर दिन होती है
वुद्दि विवेक से उत्तर बनते, प्रश्नों का अनुमान नहीं
पैर पसारे तम है फैला, सत्य सिमटता कोने में
शौहरत पाई है झूठ ने, सच का अब गुणगान नहीं
सत्य मार्ग पर चलते रहना, इतना भी आसान नहीं
रातें दिन को खूब चिढ़ाती, दिनकर का सम्मान नहीं
"जय कुमार "21/10/18
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