Mere Bhav
Saturday, 12 December 2020
बिन चाही राहो पर चलते गये
बिन चाही राहों पर चलते रहे
ख्वाबों से दूर हम निकलते रहे
कद्र वक्त की कब की है हमने
हम खुदको खुद ही क्यों छलते रहे
"जय कुमार "
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