देश में महामारी का दूसरा दौर, मौत का कहर बरपा रहा दवाखानों की कमर टूट रही है लोंगों को पलंग उपलब्द नहीं हो पा रहे हैं।, जो पलंग पर हैं उनको दवा नहीं मिल पा रही है आक्सीजन के बिना लोग तडप तड़प कर जान खो रहे हैं। अपनों को जो खो रहे हैं उनकी पीड़ा समझ पाना संभव नहीं है।
लोग सरकारों को कोस रहे हैं सरकारें आंकड़ों में उलझी हुई हैं आंकड़े अपनी कहानी सुना रहे हैं हकीकत अपना दर्द दिखा रही हैं।
हम सरकारों को क्यों कोस रहे हैं, हमने अपना अमूल्य मत किस मुद्दे पर किस प्रत्यासी को दिया यह सवाल खुदसे करना होगा। हमने शिक्षा, स्वास्थ्य की मांग की ही कब है। हम पाकिस्तान, कश्मीर, हिंदू मुस्लिम, अगडा- पिछडा, रंग जाति, भाषा, कर्ज माफी, बिजली फ्री आदि बातों पर वोट करते रहे। प्रतिनिधि चुनते रहे, सरकारें बनाते रहे ।
मार्च 2020 में प्रकृति ने हमें संभलने का मौका दिया, हम कितना संभले ? एक साल में कितने चुनाव हुए हमने स्वास्थ्य सेवाओं की बात की ?
हमें अपने प्रतिनिधियों से सरकारों से उम्मीँद वही रखनी चाहिए जिसके लिए हम चुनते है, वह सब कर रहीं हैं।
अपने आंसुओं को मजबूरी को व्यर्थ मत जाने देना कल फिर यह हमारे पास आयेगें, वोट मांगेगें ।
"जय कुमार "17/04/21
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