Mere Bhav
Monday, 21 April 2025
कोई अगलू कोई
कोई अगलू कोई जुम्मन फिर मिल न पायेगा
तेरी नफरत का ये पत्थर अब हिल न पायेगा
खून में जो दौडता मजहब का खारापन
ह्रदय में पुहुंचकर कभी यह संभल न पायेगा
"जय कुमार "
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment