Saturday, 23 July 2016

राजघाट की बाती रोती
गीता की परिपाटी रोती
अनाचार व,,दुराचार से
भारत मां की माटी रोती

जाति धरम पर दंगे होते
भाई भाई में ,,,,,,पंगे होते
दुबक रहे सच्चे ,कोने में
झूठे हर दिन ,,,,चंगे होते

वृध्दों का सम्मान नहीं है
रिश्तो मे अब जान नहीं है
टूट टूट कर,,,बिखरे ऐसे
संस्कारों की खान नहीं है

राम नाम पर धंधा होता
झूठी जाप से चंगा होता
मरने वाले ,,बहुत मिलेगे
पाखंडियो का फंदा होता

"जय कुमार "26/07/16











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