कोनऊ लाज शरम ने आबे
लरका भरे बाजार बुलयाबे
नियम कायदा सबरे तोड़ रये
मोडिन के संग नैना लडाबे
कोनऊ लाज शरम ने आबे
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घर के सबई काम धाम छोड़े
बैठ चौंतरा पे करत गपोड़े
नौनी आदत एकई ने सीखे
ठलुओं के संग चिलम दबाबे
कोनऊ लाज शरम ने आबे
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कोने चला दव जो मोबायल
ये रोग से गांव भर के घायल
कानों में लगा लई इक डोरी
जाने कोन बैरी सें बतयाबे
कोनऊ लाज शरम ने आबे
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खैतन की तो वे गैल भूल गय
गैया बछिया वे बैल भूल गय
जींस लगाके जे पटपटिया पे
गांव भर कि खोरन में उबराबे
कोनऊ लाज शरम ने आबे
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बहुअन खो जे कैंसे सजा रय
हल्के हल्के कपड़ा जे पैरा रय
मरई पर जाय ये फैंसन पे
घरभर की जे इज्जत लुटवाबे
कोनऊ लाज शरम ने आबे
लरका भरे बाजार बुलयाबे
"जय कुमार "
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