Thursday, 27 September 2018

मेरे  केवल  कुछ कहने  से,  कैंसे तुम  यूं  रूठ गये  हो
अहसासों की  छोड़ी  बगिया, फूलों  जैंसे  टूट  गये  हो

कुछ कड़वी बातों से मेरी,  आपका शायद है मन मैला 
मेरे  मन   मंदिर   में  तेरा, प्रेम  प्रकाश  केवल है फैला
जैसे बाती मिले  तेल से,  वैसे दिल से दिल मिल जाता
प्रीतम तुम जब रहो साथ में, जीवन का हर पल खिल जाता

ह्रदय से ह्रदय जब मिलता, प्रेम पथ पर पथिक है चलता
ह्रदय  का  दामन  अब छोड़ा  , शीशे  जैसे  फूट  गये  हो

कुछ कहनी कुछ ना कहनी थी, कहने  से जब मैं चूक गया
ह्रदय की प्रिय एक ना पड़ी , प्रेम का फूल तब सूख गया
कल  तक  तेरा  मेरा  ना था, चलते थे हम  साथ साथ में
सारा घर खुशबु  से  महकता, रहते थे जब  हाथ  हाथ में

नजर मिलाने से क्यों डरते, क्या काला जो दिल में रखते
वेहयाई   की  भनक  न  लगी,  चोरों  जैंसे  लूट  गये  हो

मेरे  केवल  कुछ  कहने   से, कैंसे  तुम  यूं  रूठ  गये हो
अहसासों  की  छोड़ी   बगिया, फूलों  जैंसे  टूट  गये  हो

"जय कुमार"14/10/2018

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