Saturday, 15 September 2018

पढ़ले हर कोई

पढ़ले  हर  कोई  किताब  की  तरह
छुपाये  न कुछ भी  नकाब की तरह

उलझन न रख  अपने दामन में यार
देखले  हर  कोई  लिबास की  तरह

कभी न कभी  वह सामने आ जाता
जनाब  उस बिगड़े हिसाब की तरह

इश्क वक्त के साथ करे गहरा असर
पुरानी   बंद  उस   शराब  की  तरह

जिंदगी  मीठे  जहर  का नाम  दोस्त
महफिले-यार  उस शबाब  की तरह

"जय कुमार "16/09/18

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