पढ़ले हर कोई किताब की तरह
छुपाये न कुछ भी नकाब की तरह
उलझन न रख अपने दामन में यार
देखले हर कोई लिबास की तरह
कभी न कभी वह सामने आ जाता
जनाब उस बिगड़े हिसाब की तरह
इश्क वक्त के साथ करे गहरा असर
पुरानी बंद उस शराब की तरह
जिंदगी मीठे जहर का नाम दोस्त
महफिले-यार उस शबाब की तरह
"जय कुमार "16/09/18
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