मेहनत का ये घर लगता है
हमने नींव रखी शहरों की
इसी काम का कर लगता है
छोड़ के आये अपने आंगन
उनका नगर जहर लगता है
पावों से क्या पूंछें हालत
सूर्य देव का कहर लगता है
चल रहे हम मौत के साये में
मौत से बत्तर सफर लगता है
लंबे रस्ते मजबूर है जीवन
सांस डोर से डर लगता है
आग पेट की हर दिन जलती
इसमें आग का बशर लगता है
निकल पड़े जय जिन राहो पर
यह तो अंतिम सफर लगता है
"जय कुमार"15/05/20
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