Mere Bhav
Tuesday, 26 May 2020
जिन पैरों
जिन पैरों को धोकर आये, उन पैरों में छाले हैं
भूख प्यास से विलख रहे वो, नियति के खेल निराले हैं
क्या आशा वह करें आपसे, क्यों न वह बंदूक उठायें
भ्रष्टतंत्र की भेंट चढ़े जो, छीने जिनके निवाले हैं
"जय कुमार"27/05/20
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