आवाज़ देकर फिर मुझको बुलाना होगा
सोया हुआ हूं मैं उठता नहीं किसी से
हाथ में हाथ देकर मुझे उठाना होगा
चल चुका हूं आगे वक्त ने भी साथ छोड़ा
आंखों से भीगे दामन को सुखाना होगा
मेरी रूह ने छुआ जब रूह को तुम्हारी
रंजिशो को अपनी तुम्हे भुलाना होगा
तेरी खो चुकी हैं जय आंखों की रोशनी
कब्र पर आकर एक दीप जलाना होगा
"जय कुमार "(स्वरचित) १२/०५/२०२४
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