Sunday, 5 January 2025

जिंदगी को बिखरना है

जिंदगी को बिखरना है  बिखर जाने दो 
गमों  को  निखरना  है  निखर  जाने दो

रंजिश   है   मेरी  मेरे   ही    मुकद्दर  से 
गर नब्ज़ है तो नब्ज़ का  असर जाने दो

"जय कुमार"

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