Mere Bhav
Saturday, 11 January 2025
मैंने जीवन उनके लहजे में जी लिया होता
उसकी मर्जी को उसूलों की तरह ही लिया होता
मुझपर भी बरसती फिर ये मेहरबानियां तेरी
जो सच न बोलता और होंठों को सी लिया होता
"जय कुमार "११/०१/२०२५
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment