Mere Bhav
Tuesday, 14 January 2025
उनकी तरक्की देखकर हम हाथ मलते थे ।
किसी की तरक्की देखकर हम मचलते हैं ।
अहं में अकड़कर हम मतंग मदहोश चलते हैं ।
श्मशान में देखा जब जलती चिताओं को ,
फिर अपने हिसाब किताब पर हाथ मलते हैं ।।
"जय कुमार"
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