Friday, 24 January 2014

मेरी मुहब्बत

मेरी मुहब्बत कि बस इतनी सी कहानी है..
दिल में भरा है दर्द और आँखों में पानी है..

तेरे दम पर ही जी रहा हूँ अब ये जिन्दगी 
सारी उम्र कि है बस एक ही कि बन्दगी 
तेरी यादों में ही हरियाली नजर आती है 
वर्ना चारो तरफ तो बस पानी ही पानी है..

अब कोई तो आज फिरसे करें उसकी तलाश 
कोई तो लेकर आये उसको मेरे दिल के पास 
तड़प बड़ चुकी मेरी इन प्यासी अँखियों की
हुआ ना दीदार तो मेरी जान जानी ही जानी है..

समझ सकता है बो ही मेरे दिल कि प्यास
बस बची है मेरे सबलने की एक ही आस
बेहोश हो चुका है आज फिर कोई दीवाना
आज फिर कोई भक्ति में मीरा दीवानी है..

ह्रदय को अपने मैंने अब खोलकर रख दिया
हर पल को अपने मैंने तेरे नाम कर दिया
चेहरे लाखों देखता रोज ज़माने कि राहो में
मेरे मन में बस एक तेरी ही सूरत समानी है...

"जय कुमार " 30/12/2013

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