Saturday, 4 January 2014

ये कैंसे दोस्त

जो साथ निभाने का सिर्फ वादा करते , ये कैंसे दोस्त।
जो साथ खुदगर्ज बनकर रहे हो सदा , ये कैसे दोस्त।

खून का रिस्ता ना सही भरोसे का रिस्ता  बनाया था ,
उस जज्बात  को भी ना समझ पायें  , ये कैसे दोस्त। 

जो झूठ के बल पर देते रहे हो मेरे भरोसे  को धोका,
करते रहे मुझसे ही मेरे ह्रदय का सौदा,ये कैंसे  दोस्त।   

तेरी दौलत तुझको मुबारक हो प्रेम कि राहें मेरी है ,
इन राहों पर भी साथ ना चल सकें , ये कैंसे दोस्त।

राजदार बनाया था हमने तुझको अपने हर राज का ,
जमाने में बिखेर दिया तूने मुझको , ये कैंसे दोस्त।

दिल  से लगाया था हमने जिनको काँटों भरी राहो में ,
वो ही ज़माने के सामने रुशवा करते , ये कैंसे दोस्त।        

अपनी रूह में बसाकार रखा जिनको  हमने अब तक ,
अब वो सामने आकर भी अनजान बने,ये कैसे दोस्त।

तेरे आँसुयो से मेरा दिल दहल जाता है  आज  भी  ,
मेरे जज्बातों पर हँसता है आज तू , ये कैसे दोस्त।  

" जय कुमार "


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