मेरी तन्हाई को ना जानने वाले टूट जायेँगा ,
हिज्र की आग मेँ तू भी जब जल रहा होगा ।
तेरी आँखों मेँ भी पानी का समुंदर होगा ,
जब दिल में किसी का प्रेम पल रहा होगा ।
अजनबी को जानने की ना कर कौशिश तु ,
बिछड़ेगा दिल आँधियोँ से दहल रहा होगा ।
जब अपना मजहब बताने आये होगे तुम ,
मेरा मन तो इंसानियत मेँ उछल रहा होगा ।
मुझपर भूलने का योँ इल्जाम ना लगाओ ,
हम निभायेगेँ जब जमाना बदल रहा होगा ।
भरोसा रखो अपने दिल में आऊँगा जरुर ,
जब तेरे दिल मेँ अरमान मचल रहा होगा ।
"जय कुमार" ०४ /०२ /२०१४
हिज्र की आग मेँ तू भी जब जल रहा होगा ।
तेरी आँखों मेँ भी पानी का समुंदर होगा ,
जब दिल में किसी का प्रेम पल रहा होगा ।
अजनबी को जानने की ना कर कौशिश तु ,
बिछड़ेगा दिल आँधियोँ से दहल रहा होगा ।
जब अपना मजहब बताने आये होगे तुम ,
मेरा मन तो इंसानियत मेँ उछल रहा होगा ।
मुझपर भूलने का योँ इल्जाम ना लगाओ ,
हम निभायेगेँ जब जमाना बदल रहा होगा ।
भरोसा रखो अपने दिल में आऊँगा जरुर ,
जब तेरे दिल मेँ अरमान मचल रहा होगा ।
"जय कुमार" ०४ /०२ /२०१४
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