Monday, 10 February 2014

जब जाम थे पास

जब जाम थे पास , पीने नहीं दिया मुझे ।
जिन्दगी थी मुझमें , जीने नहीं दिया मुझे ।।

करते रहे एकतरफा , भरोसा हम भी नादान
टूटने पर मुझको तूने , रोने नहीं दिया मुझे ।

किसकी गफलत थी वो , किसका था गुनाह 
आज तक अंधेरों में , जानने नहीँ दिया मुझे ।

आँखे खुली हुई मेरी , बस तेरे ही खातिर 
तेरी चाह ने अब तक , मरने नहीं दिया मुझे ।

जनाजा बनाया गया हूँ , दफनाने की खातिर
इस जमाने ने चैन से , सोने नहीं दिया मुझे ।

रुह यहीँ घूम रही , दीवानी बन चारो ओर
तेरी चाहत ने रब से , मिलने नहीँ दिया मुझे ।

"जय कुमार" ०८ /०२ /२०१४ 

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