Sunday, 2 February 2014

रेत से फिसलते रिस्ते

ये कैँसे बदलते रिस्ते
रेत से फिसलते रिस्ते
संवरते बिगड़ते रिस्ते
कभी यहाँ खिलते रिस्ते
कभी मुरझाते रिस्ते
प्रेम में मचलते रिस्ते
अहं मेँ अकड़ते रिस्ते
अपनो से सहमते रिस्ते
धोका पर रोते रिस्ते
जहर बीज बोते रिस्ते ...
हवस शिकार होते रिस्ते
अब भरोसा खोते रिस्ते
अंधी दौड़ बिखरते रिस्ते
जीत पर उछलते रिस्ते
हार पर अब जमते रिस्ते
जीवन राग गाते रिस्ते
मन की बात बताते रिस्ते
अपनो को बुलाते रिस्ते
दुनिया से मिलाते रिस्ते

"जय कुमार"
28/01/2014

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