ये कैँसे
बदलते रिस्ते
रेत से फिसलते रिस्ते
संवरते बिगड़ते रिस्ते
कभी यहाँ खिलते रिस्ते
कभी मुरझाते रिस्ते
प्रेम में मचलते रिस्ते
अहं मेँ अकड़ते रिस्ते
अपनो से सहमते रिस्ते
धोका पर रोते रिस्ते
जहर बीज बोते रिस्ते ...
हवस शिकार होते रिस्ते
अब भरोसा खोते रिस्ते
अंधी दौड़ बिखरते रिस्ते
जीत पर उछलते रिस्ते
हार पर अब जमते रिस्ते
जीवन राग गाते रिस्ते
मन की बात बताते रिस्ते
अपनो को बुलाते रिस्ते
दुनिया से मिलाते रिस्ते
"जय कुमार" 28/01/2014
रेत से फिसलते रिस्ते
संवरते बिगड़ते रिस्ते
कभी यहाँ खिलते रिस्ते
कभी मुरझाते रिस्ते
प्रेम में मचलते रिस्ते
अहं मेँ अकड़ते रिस्ते
अपनो से सहमते रिस्ते
धोका पर रोते रिस्ते
जहर बीज बोते रिस्ते ...
हवस शिकार होते रिस्ते
अब भरोसा खोते रिस्ते
अंधी दौड़ बिखरते रिस्ते
जीत पर उछलते रिस्ते
हार पर अब जमते रिस्ते
जीवन राग गाते रिस्ते
मन की बात बताते रिस्ते
अपनो को बुलाते रिस्ते
दुनिया से मिलाते रिस्ते
"जय कुमार" 28/01/2014
No comments:
Post a Comment