फरेबी बातों पर भरोसा ,,,,,,,, करता रहेगा
अपनी कश्ती में तू छेद ,,,,,,,,,,करता रहेगा
मासूमियत का फायदा ,,,,,,,जमाना उठाता
खुदगर्जो का खिलौना तू ,,,,,,,बनता रहेगा
खुदपर रख भरोसा गफलत में न रह यार
भरम दुनिया पे कर खुद को छलता रहेगा
पर्वत को हिलाने की ,,,,,,,,हिम्मत है तुझमें
क्या कंकड की चोटों से ,,,,,,, डरता रहेगा
अपनी मंजिल तू तय कर रास्ते बना अपने
बने रास्तों पर कब तक जय ,चलता रहेगा
" जय कुमार "२८/०३/१६
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