हरियाली के साथ सभी हैं , पतझड़ में बिछड़े हुए है उन परिंदों कि कौन सुनता है , जिनके घर उजड़े हुए हैं
मुफलिसी के मर्ज सजते है , दरवाजा देख झोपड़ी का जख्म में रंगत आई हुई , खुशि में कैंसे झगड़े हुए हैं
"जय कुमार "२८/०३/१६
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