गिरफ्त ख्यालों को करले ऐसा प्यार मत करना । जज्वात न समझे तेरे उससे इजहार मत करना । हिज्र की आग देकर जो ,,, रहता रकीब के साथ , उस बेमुरब्बत यार का ,,,,,,,, इंतजार मत करना ।
"जय कुमार"
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