Friday, 13 May 2016

मुश्किलों में

मुश्किलों में राह ,,,,बता गया कोई
अपनापन फिरसे ,जता गया कोई

मुस्कुराकर ऐसे मिला फिर मुझसे
गहरे जख्मों को ,,,,,छुपा गया कोई

होंठ सिले रहे ,,गुमसुम खड़ा रहा
अंदर से मुझको ,,हिला गया कोई

"जय कुमार"१४/०५/१६

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