जब तक जीवन ज्योति तन में
तेरा चेहरा मेरे ,,,,,,,,,,,,,,, मन में
आजा कसम रस्म ,,,,,तोडकर
मिल गीत गायेगें ,,,,,मधुवन में
कब तक खुद से ,,,,, दूर रहेगा
रीति रिवाजों कि ,बलि चड़ेगा
साथ बनायेगे,,,,,,,,,,, नये रास्ते
सुकूं पल ढ़ूढेगे,,,,,,,,,, जीवन में
"जय कुमार"
No comments:
Post a Comment