कलम उठती नहीं सच लिखने के लिए !
तैयार सब खड़े है ,,,,,,,,,बिकने के लिए !!
मुफलिसी के मर्ज ,,,,,,,,सजते झोपडी में ,
अमीरों की रोटियाँ,,,,सिकने के लिए !
मुहब्बत की बात,,,,रात के आगोश में ,
उजालों में छोड़ा ,,,,,,,,,बिलखने के लिए !
वागवां की हकीकत कैंसे ,,,,,बयाँ करूँ ,
फूलों को खिलाया,,,,मसलने के लिए !
दिल चुरा कर ले गये वो,,,,इक पल में ,
इश्क होता ही है,,,,,,,,लुटने के लिए !
वादों के टूटने से,,,,,,,मत टूटना जय ,
वादे तो होते है,,,,,,,,, टूटने के लिए !
"जय कुमार "१८/११/१५
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