Thursday, 19 May 2016

कलम उठती नहीं सच लिखने के लिए !
तैयार सब खड़े  है ,,,,,,,,,बिकने के लिए !!

मुफलिसी के मर्ज ,,,,,,,,सजते झोपडी में ,
अमीरों की रोटियाँ,,,,सिकने के लिए !

मुहब्बत की बात,,,,रात के आगोश में ,
उजालों में छोड़ा ,,,,,,,,,बिलखने के लिए !

वागवां की  हकीकत कैंसे ,,,,,बयाँ करूँ ,
फूलों को खिलाया,,,,मसलने के लिए !

दिल चुरा कर ले गये वो,,,,इक पल में ,
इश्क होता ही है,,,,,,,,लुटने के लिए !

वादों के टूटने से,,,,,,,मत टूटना जय ,
वादे तो होते है,,,,,,,,, टूटने के लिए !

"जय कुमार "१८/११/१५ 

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