आज खिले है कल मुरझाये हम मौसम के फूल नहीं दहसत का माहौल बना जो जायज और माकूल नहीं कर्तव्यों पर तत्पर रहे है डरना हमने नहीं सीखा बना गुलाम करो तुम शोषण हमको यह कबूल नहीं
" जय कुमार " ०९/०७/२०१७
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