चल चला चल चाल बदल ले
उठ जाग अब हाल बदल ले
मंजिल तेरी रास्ता है तेरा
चल पंक्षी अब डाल बदल ले
कल की कल पर रहने भी दे
दुनिया को कुछ कहने भी दे
इस पल की खुशी में जीले
बंदे अपना आज बदल ले
जीवन जीना सीख न पाये
हरदम खुशियां भीख में पाये
विन स्वर बाजे खूब बजाये
चल प्यारे अब ताल बदल ले
मेरा तेरा करते करते
बडी तिजोरी भरते भरते
कब काल के मुंह में पुँहचे
अब तू अपना काल बदल ले
बैठ नाव मैं छेद किये क्यों
ऊँच नीच के भेद किये क्यों
खुद फंसने को बुनते रहे जो
वह अपना अब जाल बदल ले
"जय कुमार"१७/०७/१७
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