खामोशी के आगोश में जीवन पलते रहे ।
आँधियों के साये में खार पथ पे चलते रहे ।
चले हजार कदम एक मैं तीन शून्य साथ थे ,
जद्दोजहद की आग में अरमान मचलते रहे ।।
आँधियों के साये में खार पथ पे चलते रहे ।
चले हजार कदम एक मैं तीन शून्य साथ थे ,
जद्दोजहद की आग में अरमान मचलते रहे ।।
"जय कुमार"12/10/14
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