हकीम के पास जाकर मर्ज दिखाना भूल गये ।
कुदरत से जो पाया कर्ज चुकाना भूल गये ।
मानव बनाया था हमको मिलकर रहने को ,
मानवता का भी हम फर्ज निभाना भूल गये । ।
कुदरत से जो पाया कर्ज चुकाना भूल गये ।
मानव बनाया था हमको मिलकर रहने को ,
मानवता का भी हम फर्ज निभाना भूल गये । ।
"जय कुमार"17/10/14
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