कोई श्रृँगार लिखता है ।
कोइ अँगार लिखता है ।
जमाना कहता है मुझसे
तू तेरा प्यार लिखता है ।।
कोइ अँगार लिखता है ।
जमाना कहता है मुझसे
तू तेरा प्यार लिखता है ।।
किसी को रब दिखता है ।
किसी को नभ दिखता है ।
हम अब कैँसे कहे यारो ,
मुझे तो जग दिखता है ।।
किसी को काम दिखता है ।
किसी को जाम दिखता है ।
जानता ये जमाना यारो ,
मुझे तेरा नाम दिखता है ।।
किसी को राज दिखता है ।
किसी को साज दिखता है ।
सब जान लो मेरे यारो ,
मुझे बस आज दिखता है ।।
कोई खोता नजर आया ।
कोई रोता नजर आया ।
हालात हो जाये चाहे जैसे ,
मैं तो गाता नजर आया ।।
किसी का मीत लिखता है ।
किसी का गीत लिखता है ।
कलम उठाता जय यारो ,
किसी की प्रीत लिखता है ।
"जय कुमार"29/10/14
किसी को नभ दिखता है ।
हम अब कैँसे कहे यारो ,
मुझे तो जग दिखता है ।।
किसी को काम दिखता है ।
किसी को जाम दिखता है ।
जानता ये जमाना यारो ,
मुझे तेरा नाम दिखता है ।।
किसी को राज दिखता है ।
किसी को साज दिखता है ।
सब जान लो मेरे यारो ,
मुझे बस आज दिखता है ।।
कोई खोता नजर आया ।
कोई रोता नजर आया ।
हालात हो जाये चाहे जैसे ,
मैं तो गाता नजर आया ।।
किसी का मीत लिखता है ।
किसी का गीत लिखता है ।
कलम उठाता जय यारो ,
किसी की प्रीत लिखता है ।
"जय कुमार"29/10/14
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