Monday, 15 December 2014

एक पथिक हू मैं जीवन का ।
बैठा अंगारों में ठन्डे मन का ।
राह खोजता अपनी मैं खुद ,
शूरवीर हूँ मैं अपने रण का ।।
एक पथिक हूँ मैं जीवन का . .
संघर्ष की दीवारों में रहता ।
सुख दुख हँसकर मैं सहता ।
एक घर मेरा कहते संसार ,
अभिमान नही मुझे धन का ।।
एक पथिक हूँ मैं जीवन का . .
काल की गति समझा करता ।
करता जो बो यहीं पे भरता ।
छुपाना कुछ न आता मुझको ,
अपने मन मंदिर पावन का ।।
एक पथिक हूँ में जीवन का . . .
"जय कुमार"24/11/14

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