नदियों की तरह तुझे बढ़ना होगा ।
फूलों की तरह तुझे खिलना होगा ।
फूल नसीब हो चाहे काँटे राह में ,
अपने पैरो पर तुझे चलना होगा ।
फूलों की तरह तुझे खिलना होगा ।
फूल नसीब हो चाहे काँटे राह में ,
अपने पैरो पर तुझे चलना होगा ।
दौर खिलाफ होता या मन हमारा ,
इन इल्जामोँ को तो बदलना होगा ।
जाल बिछाया खुदने खुदको जो ,
तंग रास्तों से अब निकलना होगा ।
तारे स्थिति बदलते अपनी रोज ,
साथ वक्त के तुझे बदलना होगा ।
समय की आँधी में उड़ गये ख्वाव ,
बिसरे ख्वावों को भी मचलना होगा ।
"जय कुमार"26/11/14
इन इल्जामोँ को तो बदलना होगा ।
जाल बिछाया खुदने खुदको जो ,
तंग रास्तों से अब निकलना होगा ।
तारे स्थिति बदलते अपनी रोज ,
साथ वक्त के तुझे बदलना होगा ।
समय की आँधी में उड़ गये ख्वाव ,
बिसरे ख्वावों को भी मचलना होगा ।
"जय कुमार"26/11/14
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