गीतों की माला ले आया मैं ।
प्रेम का प्याला ले आया मैं ।
भेद भाव को छोड़ छाड़कर ,
मधुशाला हाला ले आया मैं ।
प्रेम का प्याला ले आया मैं ।
भेद भाव को छोड़ छाड़कर ,
मधुशाला हाला ले आया मैं ।
जनतंत्र के पवित्र पंथ पर ।
भारत माँ के श्री चरणों में ।
भाषा , रंग , जाति भुलाकर ,
एकता की माला ले आया मैं ।।
जीवन आग जला ना पाई ।
खुदकी हस्ती भुला न पाई ।
सब संघर्षो से निकलकर के ,
दीपक जोत जला लाया मैं ।।
मुझको मुझसे मिलना था ।
पर पीड़ा को समझना था ।
मन की प्यास बुजाकर के ,
जल ज्वाला बुजा आया मैं ।।
गहरी परतों को खोजा था ।
गरतों में खुद को खोजा था ।
मैं मैं में बसने के लिए बस ,
ठाट बाट को भुला आया मैं ।।
गीतों की माला ले आया मैं ।
प्रेम का प्याला ले आया मैं ।।
भेद भाव को छोड़ छाड़कर ,
मधुशाला हाला ले आया मैं ।
"जय कुमार"30/12/14
भारत माँ के श्री चरणों में ।
भाषा , रंग , जाति भुलाकर ,
एकता की माला ले आया मैं ।।
जीवन आग जला ना पाई ।
खुदकी हस्ती भुला न पाई ।
सब संघर्षो से निकलकर के ,
दीपक जोत जला लाया मैं ।।
मुझको मुझसे मिलना था ।
पर पीड़ा को समझना था ।
मन की प्यास बुजाकर के ,
जल ज्वाला बुजा आया मैं ।।
गहरी परतों को खोजा था ।
गरतों में खुद को खोजा था ।
मैं मैं में बसने के लिए बस ,
ठाट बाट को भुला आया मैं ।।
गीतों की माला ले आया मैं ।
प्रेम का प्याला ले आया मैं ।।
भेद भाव को छोड़ छाड़कर ,
मधुशाला हाला ले आया मैं ।
"जय कुमार"30/12/14
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