मासूमों का कत्ल कालक पोत रहे हो क्यों ।
मजहब का नाम ले दफन इंसानी जज्वात ,
ज्वालामुखी जला गला गौंठ रहे हो क्यों ।
एहसास एक दिल का होता इंसानों का ,
लकीर पार इस पार दिल तोड़ रहे हो क्यों ।
मेरा दर्द तेरा दर्द दर्द का ना कोई मजहब ,
लकीरों से धरा बाँटकर दर्द बाँट रहे हो क्यों ।
खून के प्यासे हो जो भूखे हो चीखों के ,
इन दरिंद्रगो से हमदर्दी जोड़ रहे हो क्यों ।
एक पटल पर खड़े हो जाये हम दोनों ,
नस्लो को अब इस राह मोड़ रहे हो क्यो ।
मजहब का नाम ले दफन इंसानी जज्वात ,
ज्वालामुखी जला गला गौंठ रहे हो क्यों ।
एहसास एक दिल का होता इंसानों का ,
लकीर पार इस पार दिल तोड़ रहे हो क्यों ।
मेरा दर्द तेरा दर्द दर्द का ना कोई मजहब ,
लकीरों से धरा बाँटकर दर्द बाँट रहे हो क्यों ।
खून के प्यासे हो जो भूखे हो चीखों के ,
इन दरिंद्रगो से हमदर्दी जोड़ रहे हो क्यों ।
एक पटल पर खड़े हो जाये हम दोनों ,
नस्लो को अब इस राह मोड़ रहे हो क्यो ।
"जय कुमार"17/12/14
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